Who Is IPS Gaurav Yadav: कौन हैं IPS गौरव यादव? जौनपुर के छोटे से गांव से पंजाब के स्थायी DGP तक का सफर, जानिए परिवार, पढ़ाई और पूरा करियर
Who Is IPS Gaurav Yadav: पंजाब सरकार ने 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी गौरव यादव को राज्य का नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। 9 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, उन्हें न्यूनतम दो साल का कार्यकाल दिया गया है। इससे पहले वह जुलाई 2022 से पंजाब पुलिस के कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी नियुक्ति के बाद अब उनके व्यक्तिगत जीवन, शिक्षा और पुलिस सेवा के सफर को लेकर चर्चा हो रही है।
गौरव यादव भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 1992 बैच के अधिकारी हैं। उनका जन्म 16 अप्रैल 1969 को हुआ था। वह उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बेलापार गांव से ताल्लुक रखते हैं। लंबे प्रशासनिक अनुभव के बाद उन्होंने पंजाब पुलिस के सर्वोच्च पद तक का सफर तय किया है।
गौरव यादव पंजाब में कार्यवाहक डीजीपी के रूप में चार साल से अधिक समय तक जिम्मेदारी निभा चुके हैं। अब राज्य सरकार ने उन्हें नियमित डीजीपी नियुक्त कर दिया है। इस पद पर उनकी नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से भेजे गए तीन अधिकारियों के पैनल के आधार पर की गई है।
जौनपुर के बेलापार गांव से है नाता
गौरव यादव का पैतृक संबंध उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बेलापार गांव से है। उनके पिता भगवती प्रसाद यादव सेना में कर्नल रह चुके हैं। परिवार में सैन्य सेवा की पृष्ठभूमि होने के कारण उनका शुरुआती जीवन अनुशासन और शिक्षा के माहौल में बीता।
उनकी स्कूली और उच्च शिक्षा कानपुर, लखनऊ और दिल्ली में हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ लोक प्रशासन में उच्च शिक्षा भी प्राप्त की। उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में इंजीनियरिंग, लोक प्रशासन में एमए और पीएचडी का उल्लेख मिलता है।
हालांकि, उनके निजी जीवन से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक रूप से समान विस्तार में उपलब्ध नहीं हैं।
इंजीनियरिंग और लोक प्रशासन की पढ़ाई के बाद चुनी IPS सेवा
गौरव यादव की शैक्षणिक पृष्ठभूमि दूसरे कई प्रशासनिक अधिकारियों से अलग रही है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में करियर बनाया। वर्ष 1992 में IPS में शामिल होने के बाद उन्होंने पंजाब कैडर में अपनी सेवाएं दीं।
पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण से जुड़े काम भी किए। वह पंजाब पुलिस के मॉडर्नाइजेशन विंग में काम कर चुके हैं। इसके अलावा, पंजाब सरकार में मुख्यमंत्री भगवंत मान के स्पेशल प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में भी उनकी भूमिका रही है। उनका करियर पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के साथ समन्वय से जुड़ी जिम्मेदारियों तक फैला रहा है।
जुलाई 2022 में बने थे पंजाब के कार्यवाहक DGP
पंजाब पुलिस के प्रमुख के रूप में गौरव यादव की भूमिका जुलाई 2022 में शुरू हुई थी। उस समय उन्हें कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था।
इससे पहले वीके भावरा पंजाब के डीजीपी थे। मई 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद राज्य पुलिस नेतृत्व में बदलाव हुआ था। इसके बाद भावरा को छुट्टी पर जाने के लिए कहा गया और गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
गौरव यादव ने इसके बाद लगातार राज्य पुलिस के प्रमुख के रूप में काम किया। हालांकि, नियमित डीजीपी की नियुक्ति का मामला लंबे समय तक लंबित रहा। इस बीच स्थायी नियुक्ति के लिए UPSC की प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन राज्य सरकार ने अंतिम निर्णय अक्टूबर 2026 में लिया।
कैसे हुई नियमित DGP के पद पर नियुक्ति?
पंजाब में नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम UPSC को भेजे थे। आयोग ने 30 जून 2026 को तीन अधिकारियों के नाम वाले पैनल को मंजूरी दी। इस पैनल में गौरव यादव के अलावा डॉ. शरद सत्या चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू शामिल थे।
पैनल में शामिल तीनों अधिकारी 1992 बैच के हैं। इनमें शरद सत्या चौहान वरिष्ठता के क्रम में आगे थे। इसके बावजूद राज्य सरकार ने गौरव यादव को नियमित डीजीपी नियुक्त करने का फैसला लिया।
9 अक्टूबर 2026 को पंजाब सरकार के गृह विभाग ने नियुक्ति आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक, राज्यपाल ने गौरव यादव को पंजाब का पुलिस महानिदेशक (Head of Police Force) नियुक्त किया है।
यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में पुलिस सुधारों से संबंधित निर्देशों के अनुरूप की गई है।
कम से कम दो साल का होगा कार्यकाल
नियमित डीजीपी के रूप में गौरव यादव का कार्यकाल न्यूनतम दो साल निर्धारित किया गया है। यह अवधि उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से गिनी जाएगी।
डीजीपी की नियुक्ति और कार्यकाल का उद्देश्य राज्य पुलिस नेतृत्व में स्थिरता बनाए रखना है। नियमित नियुक्ति के बाद पुलिस प्रमुख की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित होती हैं और लंबे समय तक कार्यवाहक व्यवस्था बनाए रखने की स्थिति समाप्त होती है।
पंजाब में गौरव यादव की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई, संगठित अपराध पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे पुलिस प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
नशे और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ अभियानों में भूमिका
गौरव यादव के कार्यकाल के दौरान पंजाब पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ और गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ‘ऑपरेशन प्रहार’ जैसे अभियानों पर काम किया है।
इन अभियानों का उद्देश्य नशे के नेटवर्क और संगठित अपराध से जुड़े लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को आगे बढ़ाना रहा है। ऐसे अभियानों की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए गिरफ्तारी, जब्ती, मामलों की जांच और अदालतों में मुकदमों के परिणाम जैसे आधिकारिक आंकड़े महत्वपूर्ण होते हैं।
नियमित डीजीपी बनने के बाद गौरव यादव के नेतृत्व में इन अभियानों की निरंतरता और पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी।
UPSC पैनल में कौन-कौन अधिकारी थे?
गौरव यादव की नियुक्ति से पहले UPSC ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल तैयार किया था।
1. गौरव यादव: 1992 बैच के IPS अधिकारी। जुलाई 2022 से पंजाब के कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब उन्हें नियमित डीजीपी नियुक्त किया गया है।
2. डॉ. शरद सत्या चौहान: 1992 बैच के IPS अधिकारी। वह पंजाब विजिलेंस ब्यूरो में चीफ डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे और पैनल में वरिष्ठता के क्रम में आगे थे।
3. हरप्रीत सिंह सिद्धू: 1992 बैच के IPS अधिकारी। वह स्पेशल डीजीपी के रूप में जाने जाते हैं और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद उनकी पोस्टिंग को लेकर भी चर्चा रही थी।
राज्य सरकार ने इसी पैनल में से गौरव यादव के नाम पर अंतिम मुहर लगाई।
पंजाब के नए नियमित DGP के सामने क्या होंगी प्रमुख चुनौतियां?
नियमित डीजीपी के रूप में गौरव यादव के सामने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां होंगी। इनमें नशे की तस्करी पर रोक, गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस बल का आधुनिकीकरण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना शामिल है।
इसके साथ ही पुलिस की जवाबदेही, जांच की गुणवत्ता, साइबर अपराध से निपटने की क्षमता और आम नागरिकों के साथ पुलिस के व्यवहार जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
इन चुनौतियों से निपटने में पुलिस बल की क्षमता, खुफिया जानकारी, अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय और न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावशीलता अहम भूमिका निभाएगी।
